नई शिक्षा नीति 2020

आजादी से पहले अंग्रेजों के  समय से लागू लॉर्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को समाप्त करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार ने नई शिक्षा नीति की घोषणा की। केंद्रीय कैबिनेट ने 29 जुलाई को देश में भारतीय शिक्षा को ध्यान मे रखकर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को देश को समर्पित किया।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अगले शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से पूरे देश लागू हो जाएगी । शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों व आम
नागरिकों की राय मशवरा और सुझाव लेकर नई शिक्षा नीति को तैयार किया गया।

नई शिक्षा नीति में शामिल प्रमुख बिंदु को देखते और समझते हैं।

(1 ) अभी तक हमारे देश में 10+2 शिक्षा व्यवस्था लागू है, इसे इस तरह समझते है कि कक्षा 1 से लेकर 10 तक एक प्रकार के पढ़ाई  कराई जाती थी और कक्षा 10 के बाद छात्र किस क्षेत्र में जायेगा यह तय होता था ।लेकिन नई शिक्षा व्यवस्था में अब 5+3+3+4 व्यवस्था लागू हो जाएगी.
 पहले 5 वर्षों में बच्चों में किताबो का बोझ नहीं होगा। यानी इन 5 वर्षों में छात्रों का मानसिक, शारीरिक व शैक्षणिक विकास साथ-साथ किया जायेगा. इसका पाठ्यक्रम NCERT द्वारा तैयार किया जायेगा ।इसके तहत  5 वर्षों में बच्चे को पहले 3 वर्षों तक pre primary शिक्षा दी जाएगी। बाद के दो वर्ष में class-1 व 2 की पढाई करनी पड़ेगी.

(2)  उसके बाद अगले 3 वर्षों में class 3 से class5 तक की पढ़ाई करनी होगी. इसको Foundation stage कहा जायेगा।
(3) अब कक्षा 6 से 8 के दौरान ही छात्र को Computer codlog  सिखाई जाएगी और उसके साथ-साथ इंटर्नशिप भी कराई जाएगी ।यदि किसी छात्र की app बनाने में रूचि है या पेंटिंग में रुचि है या सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में उसकी रूचि है तो वह छात्र पढ़ाई के साथ-साथ किसी पेंटर अथवा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ इंटर्नशिप  कर सकेगा और उस क्षेत्र में अपना करियर शुरू कर सकेगा।

(4)  इसके बाद के 4 साल  class 9 से 12 की पढ़ाई के दौरान समझने की क्षमता व तर्कशक्ति में वृद्धि  करते हुए  बड़े लक्ष्य के लिए प्रेरित करने वाले पाठ्यक्रम से रूबरू कराया जायेगा.

(5) इसके बाद class 9 से 12 की पढ़ाई अब सेमेस्टर सिस्टम के तहत होगी जिसमें एक साल में दो बार हर 6 महीने पर exam होगा।बोर्ड के तहत होने वाले exam को सरल किया जाएगा  तथा रटने के बजाये समझने पर जोर दिया जायेगा ।

(6) स्टूडेंट्स अपना  मूल्यांकन स्वयं करेगा, उसके classmate व teacher भी उसका मूल्यांकन करेंगे ।

(7)स्नातक को अब 3 व 4 वर्षों के 2 भाग में बाँट दिया जायेगा. इसमें multiple Entry एवं Multiples फार्मूला लागू होगा ।इसे ऐसे समझते है  कि यदि कोई स्टूडेंट् को किसी कारण से एक साल में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है तो उसे सर्टिफिकेट कोर्स का प्रमाण पत्र दिया जाएगा, तथा एक नियत समय सीमा मे यदि वह future में दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहेगा तो उसे शुरू से पढ़ाई न करते हुए उस 1 वर्ष से आगे की पढ़ाई शुरू करनी होगी. इसी  तरह 2 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र को डिप्लोमा प्रमाण पत्र जबकि 3 वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र को स्नातक प्रमाण पत्र दिया जायेगा. यदि कोई छात्र पूरे 4 वर्ष का कोर्स करेगा तो उसे शोध के साथ स्नातक की डिग्री दी जाएगी ।
(8)  नई व्यवस्था में एम फिल डिग्री को समाप्त कर दिया जायेगा.
9) मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है
 
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(10) जीडीपी का 6% शिक्षा के क्षेत्र में लगाया जायेगा जो कि अभी जीडीपी का सिर्फ 4.43 %है
(11)छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे.जो स्टूडेंट्स चाहेंगे उन्हें  six class के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी. इसके अलावा म्यूज़िक और आर्ट्स को बढ़ावा दिया जाएगा।

 (12) यूजीसी ( UGC )और एआईसीटीई के खत्म कर दिए जाएंगे ।high education लिए एक singal रेगुलेटर रहेगा (low और medical education)  को छोड़कर पूरे high education के लिए एक नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा।

(13) High education मे 2035 तक 50 फीसदी GER (Gross Enrolment Aatio) पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

(14) High education में कई बदलाव किए गए हैं, जो स्टूडेंट्स रिचर्स करना चाहते हैं उनके लिए चार साल का डिग्री प्रोग्राम होगा. जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे. लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं। उन्हें एमफिल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी,
शोध करने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालयों के माध्यम से शोध की संस्कृति को बढ़ावा देना होगा. एनआरसी स्वतंत्र रूप से सरकार द्वारा एक बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा कंट्रोल होगा.
(15) ई-पाठ्यक्रम लोकल भाषा में विकसित किए जाएंगे. वर्चुअल लैब विकसित की जाएंगीऔर एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (GF) बनाया जाएगा।

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