शुक्र मिशन ( भारत और फ्रांस का संयुक्त मिशन)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी द स्पेस सेंटर फॉर स्पेस स्टडीज़ (CNES)  वर्ष 2025 में शुक्र मिशन को शुरू करने पर सहमति बनी है।यह मिशन एक साझा कार्यक्रम होगा।
ISRO के अध्यक्ष के सिवन और CNES के अध्यक्ष जीन-यवेस ले गैल ने बातचीत के बाद यह तय हुआ कि दोनों देश अंतरिक्ष में आपसी सहयोग से संचालित होने वाले क्षेत्रों की भी समीक्षा  करेंगें।मार्स ऑर्बिटर मिशन (मिशन मंगलयान) और चंद्र मिशन चंद्रयान -1 और 2 के बाद, अब इसरो ने अपने नए मिशन को अंजाम देने के लिए शुक्र को चुना है।


30 सितंबर 2020 को  फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES द्वारा दिये गये एक बयान के अनुसार, VIRAL (वीनस इन्फ्रारेड एटमॉस्फेरिक गैस लिंकर) इंस्ट्रूमेंट, जिसे रूसी संघीय अंतरिक्ष एजेंसी ROSCOSMOS और CNRS से जुड़ी वायुमंडल, वातावरण और अंतरिक्ष अवलोकन प्रयोगशाला LATMOS (राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र) जिसे फ्रांस ने एक साथ मिलकर विकसित किया  है, के एक प्रस्ताव  के बाद इसरो द्वारा चुना गया है। ये मिशन दोनों देशों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र नए आयाम स्थापित करेगा ।

CNES इस मिशन में अपना योगदान देगा । पहली बार होगा जब एक फ्रांसीसी पेलोड को भारतीय अन्वेषण मिशन के साथ उड़ाया जाएगा । इस मिशन के साथ ही दोनों राष्ट्र अपनी विशेषज्ञता और कार्यकुशलता का इस्तेमाल करेंगें।  अंतरिक्ष यात्री के स्वास्थ्य  की देखभाल और  इसके  साथ ही अंतरिक्ष में जीवन समर्थन और अंतरिक्ष चिकित्सा के क्षेत्र में मिलजुल कर काम करने के लिए  तैयार हो गए है।

दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच निम्न बिन्दुओं पर सहमति बनी है।

(1) फ्रांस और भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में परस्पर मजबूत सहयोग साझा करते हैं.

(2)  भारत द्वारा चुने गए  उन तीन राष्ट्रों में से फ्रांस एक है। फ्रांस के साथ भारत अंतरिक्ष, परमाणु और रक्षा के क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है ।फ्रांस के अलावा अन्य दो देश संयुक्त राज्य अमेरिका और रुस है।दोनों देशों ने अंतरिक्ष सहयोग के लिए एक संयुक्त विजन’ जारी किया था ।
(3)  इसरो के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान परियोजना’ पर भी भारत और फ्रांस एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं. इसका लक्ष्य वर्ष 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजना है.

(४) सितंबर, 2018 से ISRO और CNRES ने मानव अंतरिक्ष यान के क्षेत्र में सहयोग पर बातचीत चल रही थी  जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा  केंद्रित एक कार्य समूह भी बनाया है।

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