टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट ( TET, )

टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट   ( tet )
क्या है और आवश्यकता

  अचानक टीईटी की आवश्यकता क्यों पड़ी इसका उत्तर जानने के लिए हमें प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण के बारे में जाना होगा । सार्वभौमीकरण का अर्थ होता है सबके लिए उपलब्ध कराना। सभी बच्चों के लिए पहली से आठवीं कक्षा तक निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा के लिए स्कूल बच्चों के घर के समीप हो तथा 14 वर्ष तक के बच्चे स्कूल ना छोड़ें।सन 2002 में संविधान के 86 वें संसोधन द्वारा अनुच्छेद 21 ए के भाग 3 के माध्यम से 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया ।इसको प्रभावी बनाने के लिए  4 अगस्त 2009 को लोकसभा में यह अधिनियम पारित किया गया।जो 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हो गया।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 23 अगस्त 2010 को सूचना जारी कर राजकीय एवं निजी स्कूलों के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक बनने के लिए tet पास करना अनिवार्य कर दिया।राज्य एवं केंद्र सरकार के लिए साल में एक बार tet परीक्षा करना अनिवार्य है।परीक्षा उत्तीर्ण करने पर अभ्यर्थियों को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा  यह प्रमाण पत्र कब तक वैध होगा इसका निर्धारण परीक्षा संचालित करने वाली संस्था तय करेगी लेकिन ये 7 वर्ष से अधिक नही हो सकता।कोई भी राज्य 7 वर्ष से कम वैधता अवधि तो तय कर सकता है लेकिन अधिक नही। 
विषय  क्षेत्र- विज्ञान ;गणित ;सामाजिक अध्ययन ,पर्यावरण, हिंदी अंग्रेजी

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