कोरोना महामारी में उपयोगी DRDO द्वारा विकसित 2-DG दवा

महामारी की पहली लहर के दौरान अप्रैल 2020 में, INMAS-DRDO के वैज्ञानिकों ने सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB), हैदराबाद की मदद से प्रयोगशाला परीक्षण किए और पाया कि यह दवा  SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है और वायरस के बढ़ने से रोकती है

नेशनल ड्रग रेगुलेटर, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने COVID-19 रोगियों में आपातकालीन उपयोग के लिए 2- DG को मंजूरी दी थी।


2DG का पूरा नाम 2डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज
(2-Deoxy-D-glucose) है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने 17 मई को  एंटी-COVID-19 का पहला बैच जारी किया है.

एक सामान्य अणु और ग्लूकोज का एनालॉग होने के कारण, इसे भारत में आसानी से उत्पादित और उपलब्ध कराया जा सकता है.

एंटी-COVID-19 दवा को डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज (DRL), हैदराबाद की सहायता से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRL) की प्रयोगशाला, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) द्वारा विकसित किया गया है

इसके  परीक्षण परिणामों द्वारा पता चला है कि अस्पताल में भर्ती रोगियों की तेजी से रिकवरी में यह अणु मदद करता है और बाहर से ऑक्सीजन देने की जरूरत को भी कम करता है.

2-Deoxy-D-glucose (2-DG) पाउडर के रूप में पाउच में आती है और इसे पानी में घोलकर लेना होता है. यह दवा वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन को रोककर वायरस के बढ़ने को रोकती  है

क्लीनिकल ट्रायल पूरे भारत में 11 अस्पतालों में आयोजित किया गया था. वहीं फेज-2 में 110 मरीजों का ट्रायल किया गया

नवंबर 2020 में, सफल परिणामों के आधार पर DCGI ने चरण-3 diagnostic test की अनुमति दी. यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में स्थित 27 COVID-19 अस्पतालों में दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक 220 रोगियों पर आयोजित किया गया था.

तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल से पता चला कि रोगियों के लक्षणों में काफी ज्यादा अनुपात में सुधार आया, और SoC की तुलना में तीसरे दिन तक रोगी पूरक ऑक्सीजन पर निर्भरता कम हो गई।इसी प्रकार की प्रवृत्ति 65 वर्ष से अधिक आयु के रोगियों में देखी गई.

वर्तमान में दूसरी COVID-19 लहर में काफी बहुत बड़ी मात्रा में मरीज गंभीर रूप से ऑक्सीजन निर्भरता का सामना कर रहे हैं । जिस प्रकार से यह दवा संक्रमित कोशिकाओं में काम करती है इससे COVID-19 मरीजों को अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा यानी अस्पताल में बिताए जाने वाले दिनों की संख्या भी कमी हो जाएगी।

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